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Thursday, 26 March 2020

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक अवलोकन

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक अवलोकन

अवलोकन, संक्षिप्त इतिहास और भारतीय संविधान का विकास

ब्रिटिश प्रशासन को मोटे तौर पर दो चरणों में बांटा जा सकता है, वह है

(1) कंपनी प्रशासन (1773-1857)
(2) क्राउन प्रशासन (1858-19 47)

निम्नलिखित महत्वपूर्ण अधिनियम, नियम और विकास हैं जो की वर्तमान भारतीय राजनीति के विकास की ओर अग्रसर हैं।

कंपनी प्रशासन

अधिनियम विनियमन - 1773

(1) 'गवर्नर' का पद अब 'गवर्नर-जनरल' बनाया गया है और बंगाल ऐसा पहला प्रांत था जहा के पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे, उन्हें चार सदस्यों की कार्यकारी परिषद ने सहायता प्रदान की।
(2) कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीशों के साथ हुई थी। सर एलीया इंपी मुख्य न्यायाधीश थे

पिट्स इंडिया एक्ट - 1784

(1) भारत में राजनीतिक मामलों का प्रबंधन करने के लिए एक और संगठन- 'नियंत्रण का बोर्ड' बनाया गया। हालांकि निदेशक मंडल को वाणिज्यिक मामलों के प्रबंध करने के लिए रखा गया ।
(2) इस प्रकार, कंपनियों के अधिकार को पहली बार 'भारत में ब्रिटिश अधिकार' नाम कहा गया और वाणिज्यिक शाखा का नेतृत्व निदेशक मंडल और राजनीतिक दल का नेतृत्व नियंत्रण मंडल कर रहे है।
(3) इस अधिनियम को तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री विलियम पिट ने पेश किया था

चार्टर अधिनियम - 1813: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक अधिकारों के एकाधिकार को समाप्त किया और अन्य कंपनियों को भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों में भाग लेने की इजाजत दी।

चार्टर अधिनियम - 1833

(1) बंगाल के गवर्नर जनरल के पद के स्थान पर भारत के गवर्नर जनरल पद बनाया गया। मद्रास और बॉम्बे की अध्यक्षताएं विधायी शक्तियों के साथ उनसे ले ली गयी और कलकत्ता की अध्यक्षता के अधीन कर दिया गया। विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर जनरल थे।
(2) इस अधिनियम ने पूरी तरह से कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियों को समाप्त कर दिया। कंपनी अस्तित्व में थी, लेकिन यह एक विशुद्ध प्रशासनिक और राजनीतिक संगठन बन गई थी।

चार्टर अधिनियम - 1853

(1) एक अलग गवर्नर जनरल की विधान परिषद की स्थापना की गयी।
(2) भारतीयों के लिए सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता प्रणाली का परिचय किया गया। इस उद्देश्य के लिए मैकाले समिति का गठन हुआ (1854) सत्यसेन नाथ टैगोर 1863 में उस सेवा को पास करने वाले पहले भारतीय बन गए।
(3) नोट - भारत में सिविल सेवा के पिता - लॉर्ड चार्ल्स कोनवलिस क्योंकि उनके भारत में नागरिक सेवाओं के आधुनिकीकरण के प्रयासों के कारण।

क्राउन प्रशासन

1858 भारत सरकार अधिनियम

(1) इसे भारत की अच्छी सरकार के अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है।
(2) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया मुगल प्रशासन को भी समाप्त कर दिया गया।
(3) गवर्नर जनरल के पद को समाप्त कर दिया और एक नया पोस्ट वायसरॉय बनाया। लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बनाये गये।
(4) इसके अलावा भारत के लिए सचिव-राज्य बनाया गया और इनकी मदद के लिए 15-सदस्यीय परिषद बनायीं गयी। यह सदस्य ब्रिटिश संसद के सदस्य थे।

भारतीय परिषद अधिनियम 1861

(1) वाइसराय की कार्यकारी परिषद का विस्तार किया गया। कुछ भारतीयों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नामांकित करने के लिए उनके लिए प्रावधान किए गए। लॉर्ड कैनिंग ने बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को नामांकित किया।
(2) बंगाल के लिए नई विधान परिषदें (1862), उत्तरपश्चिमी सीमावर्ती प्रांत (1866) और पंजाब (1897) की स्थापना हुई।

भारतीय परिषद अधिनियम 1892

(1) तत्कालीन भारत में बजट चर्चा का अधिकार विधायी परिषद को दिया गया।
(2) बढाई गयी परिषदों और कुछ सदस्यों को केंद्र क साथ साथ प्रांतीय विधान परिषद में नामांकित किया जा सकता है।

भारतीय परिषद अधिनियम 1909

(1) यह अधिनियम मॉर्ले-मिंटो सुधार के रूप में भी जाना जाता है।
(2) केन्द्रीय विधान परिषद में सदस्यों की संख्या 16 से बढ़कर 60 की गयी।
(3) सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए कानून सदस्य के रूप में नामांकित होने वाले पहले भारतीय बने।
(4) सांप्रदायिक मतदाता पेश किया गया था। मुस्लिमों को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए अलग प्रतिनिधित्व दिया गया। इसलिए, मिंटो को 'सांप्रदायिक मतदाता के पिता' के रूप में भी जाना जाता है।

भारत सरकार अधिनियम 1919

(1) यह अधिनियम मोंटेग-चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है और यह 1921 में लागू हुआ था।
(2) यहा केन्द्रीय और प्रांतीय विषयों या सूचियों को पेश किया गया जहां वे अपने संबंधित सूचियों को कानून तैयार कर सकते थे। प्रांतीय विषयों को हस्तांतरित और आरक्षित में विभाजित किया गया था। इस प्रकार, इस अधिनियम ने दोहरा शासन की शुरुआत कि।
(3) द्विसदन और प्रत्यक्ष चुनाव शुरू किए गए।

भारत सरकार अधिनियम 1935

(1) इकाइयों के रूप में प्रांतों और रियासतों के साथ अखिल भारतीय संघ की स्थापना की गयी। महासंघ कभी भी अस्तित्व में नहीं आया क्योंकि रियासतों ने इसे शामिल नहीं किया था।
(2) प्रांतों में समाप्त हुई दोहरा शासन और इसके स्थान पर 'प्रांतीय स्वायत्तता' पेश की। लेकिन केंद्र में यह दोहरा शासन शुरू किया; हालांकि वह कभी भी अस्तित्व में नहीं आया था।
(3) साथ ही साथ उदास वर्गों के लिए अलग-अलग मतदाताओं के साथ-साथ प्रान्तों में द्विसदन भी शुरू किया।
(4) केंद्र में आरबीआई और एक संघीय अदालत की स्थापना की गयी।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947

(1) विभाजन योजना या माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) देश के विभाजन और आथली घोषणा (20 फरवरी 1947) को देश को स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए प्रभाव देना था।
(2) भारत और पाकिस्तान के दो स्वतंत्र आधिकारिक रूप से निर्मित किये गये, ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया और अपने स्वतंत्र संविधानों को तैयार करने के लिए दो स्वतंत्र राष्ट्रों के घटक विधानसभा को अधिकृत किया।
(3) भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को 18 जुलाई, 1947 को शाही सहमति मिली।

 

 

 

Thursday, 30 January 2020

क्या है पद्म_पुरस्कार?

क्या है पद्म_पुरस्कार

🎑 पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं। यह पुरस्कार, कला, सामाजिक कार्य, जन हित के मामलों, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, व्यापार एवं उद्योग, मेडिसिन, साहित्य तथा शिक्षा, खेल-कूद तथा नागरिक सेवाओं के लिए दिए जाते हैं। ये पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर उद्घोषित किये जाते हैं तथा सामान्यतः मार्च/अप्रैल माह में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किये जाने वाले सम्मान समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किये जाते हैं।  वर्ष 1954 में पहली बार पद्म अवार्ड की घोषणा की गई थी। 1978, 1979, 1993 और 1997 के अलावा से इन पुरस्कार की घोषणा हर साल किया जा रहा है। एक साल दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की संख्या 120 से ज्यादा नहीं होती है।

पद्म पुरस्कार की श्रेणियां

पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं।
Padma-Awards-burnished bronze

1. पद्म विभूषण
पद्म पुरस्कार भारत-रत्न के बाद भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान में पुरस्कार स्वरूप 1.3/16 इंच का कांसे का एक बिल्ला मिलता है। इसके केंद्र में एक कमल का फूल होता है। इसमें सफेद रंग में फूल की पत्तियां होती हैं। इस फूल के ऊपर नीचे पद्म विभूषण लिखा होता है। वहीं इस बिल्ले के पिछले हिस्से में अशोक चिन्ह बना होता है।

2. पद्म भूषण
पद्म पुरस्कार भारत-रत्न और पद्म विभूषण के बाद भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट कोटि की विशिष्ट सेवा के लिये दिया जाता है। इस सम्मान में भी कांसे का बिल्ला दिया जाता है। इसमें भी बीच में कमल का फूल बना होता है जिसकी तीन पत्तियां इसे घेरे रहती हैं। इस फूल के ऊपर नीचे पद्मभूषण लिखा रहता है।

3. पद्म श्री
पद्म श्री पुरस्कार भारत-रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण के बाद भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान भारत सरकार द्वारा किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के फलस्वरूप प्रदान किया जाता है। भारत सरकार द्वारा आम तौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला सम्मान है। इस सम्मान में भी कांसे का बिल्ला दिया जाता है जिसमें कमल का फूल बना रहता है।

कैसे होता है चयन?

इस सम्मान के लिए नामों पर विचार करने के लिए प्रधानमंत्री हर साल एक समिति का गठन करते हैं। पदम पुरस्‍कारों की सिफारिश राज्‍य सरकार/संघ राज्‍य प्रशासन, केन्‍द्रीय मंत्रालय/विभाग के साथ साथ उत्‍कृष्‍टता संस्‍थानों आदि से प्राप्‍त की जाती हैं। इसके बाद यह समिति इन नामों पर विचार करती है। पुरस्कार समिति जब एक बार सिफारिश कर देती है फिर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रपति इस पर अपना अनुमोदन देते हैं और इसके बाद गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन सम्मानों की घोषणा की जाती है।
पद्म पुरस्कारों के चयन में पारदर्शिता लाने हेतु केन्द्र सरकार ने वर्ष 2017 से पद्म पुरस्कारों के नामांकन के लिए नियम बदल दिए। केन्द्र सरकार ने एक 01 मई 2016 से एक पोर्टल शुरू किया है जहां व्यक्तिगत रूप से, मंत्रालयों अथवा राज्य सरकारों द्वारा की गई सिफारिशें स्वीकार की जा सकती है। पोर्टल के अलावा किसी भी अन्य तरीके से नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सिफारिश करने वाले को अपना नाम और आधार कॉर्ड के नंबर का उल्लेख करना होगा।

Saturday, 12 October 2019

भारत के उपराष्ट्रपति पर महत्वपूर्ण राजनीति नोट्स

भारत के उपराष्ट्रपति पर महत्वपूर्ण राजनीति नोट्स
भारत के उप-राष्ट्रपति (आर्टिकल्स 63-73)

भारतीय संविधान के भाग पांच में पहला अध्याय (कार्यकारी) भारत के उप-राष्ट्रपति के कार्यालय के बारे में चर्चा करता है। भारत के उप-राष्ट्रपति का ऑफिस देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।

अनुच्छेद 63: भारत के उप-राष्ट्रपति

भारत में एक उप-राष्ट्रपति होंगे।
अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का पद राज्य सभा के पदेन सभापति के रूप में है।

उपराष्ट्रपति का पद राज्य सभा के पदेन परिषद के अध्यक्ष सभापति के रूप में है और वह कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा:
दिया गया है कि उस दौरान जब उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करने के दौरान, वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और राज्यों की परिषद के अध्यक्ष के तौर पर कोई वेतन या भत्ता अनुच्छेद 97 के तहत लेने का हकदार नहीं होगा।
अनुच्छेद 65

उप-राष्ट्रपति को कार्यालय में आकस्मिक रिक्तियों के दौरान अपने कार्यों का निर्वहन, या राष्ट्रपति की अनुपस्थिति के दौरान राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना होगा।
अनुच्छेद 66: उप-राष्ट्रपति का चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव एक चुनावी कॉलेज के सदस्यों द्वारा किया जायेगा जिसमे संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा मिलकर चुना जायेगा। हालांकि, यह चुनाव राष्ट्रपति के उस चुनाव से अलग है क्योंकि राज्य विधानसभाओं का इसमें कोई हिस्सा नहीं है। कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा जब वह—
भारत का नागरिक है,

पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और
राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।
कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में से किसी के नियंत्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।
स्पष्टीकरण- इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति केवल इस कारण कोई लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य का राज्यपाल है अथवा संघ का या किसी राज्य का मंत्री है।
अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि

उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा:

परंतु--

उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;
उपराष्ट्रपति, राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोकसभा सहमत है; किंतु इस खंड के प्रयोजन के लिए कोई संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस संकल्प को प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो;
उपराष्ट्रपति, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
अनुच्छेद 68:

उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि
(1) उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जाएगा।

(2) उपराष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से हुई उसके पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, रिक्ति होने के पश्चात्‌ यथाशीघ्र किया जाएगा और रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति, अनुच्छेद 67 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की पूरी अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा।

अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान-

प्रत्येक उपराष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्‌: --
ईश्वर की शपथ लेता हूँ

''मैं, अमुक ---------------------------------कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ, श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूँ उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगा।''

अनुच्छेद 70:

अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन--संसद, ऐसी किसी आकस्मिकता में जो इस अध्याय में उपबंधित नहीं है, राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगी जो वह ठीक समझे।
अनुच्छेद 71: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय—

(1) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न या संसक्त सभी शंकाओं और विवादों की जांच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।
(2) यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया जाता है तो उसके द्वारा, यथास्थिति, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन में उच्चतम न्यायालय के विनिश्चय की तारीख को या उससे पहले किए गए कार्य उस घोषणा के कारण अधिमान्य नहीं होंगे।

(3) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी।

(4) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में किसी व्यक्ति के निर्वाचन को उसे निर्वाचित करने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों में किसी भी कारण से विद्यमान किसी रिक्ति के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

भारत के उप-राष्ट्रपतियों की सूची (कार्यकाल के साथ)

Name of Vice President Office Period
Sarvepalli Radhakrishnan 1952-1962
Zakir Husain 1962-1967
Varahagiri Venkata Giri 1967-1969
Gopal Swarup Pathak 1969-1974
Basappa Danappa Jatti 1974-1979
Mohammad Hidayatullah 1979-1984
Ramaswamy Venkataraman 1984-1987
Shankar Dayal Sharma 1987-1992
Kocheril Raman Narayanan 1992-1997
Krishan Kant 1997-2002
Bhairon Singh Shekhawat 2002-2007
Mohammad Hamid Ansari 2007-2017
Muppavarapu Venkaiah Naidu 2017- till date




Monday, 1 July 2019

राजनीति: गैर संवैधानिक निकायों की सूची

राजनीति: गैर संवैधानिक निकायों की सूची


गैर-संवैधानिक या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय एक संसदीय कानून पारित होने के बाद स्थापित किए गए निकाय हैं। तात्पर्य यह है कि हमारे संविधान में इन संस्थानों का उल्लेख नहीं है।


योजना आयोग


1. इस आयोग को के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में 1946 में गठित योजना सलाहकार बोर्ड की संस्तुति पर भारत सरकार (अर्थात् केंद्रीय मंत्रिमंडल) के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा मार्च, 1950 में स्थापित किया गया है, इस प्रकार, योजना आयोग न तो एक वैधानिक संस्थान और न ही एक संवैधानिक संस्थान हैI अन्य शब्दों में, यह एक गैर-संवैधानिक या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय (अर्थात् संविधान द्वारा निर्मित नहीं) और एक गैर-वैधानिक निकाय (अर्थात् संसद के एक अधिनियम द्वारा निर्मित नहीं) हैI भारत में, यह सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजना का सर्वोच्च अंग हैI अब, 1 जनवरी, 2015 से इसे एक अन्य निकाय नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया हैI


2. भारत का प्रधानमंत्री आयोग का पदेन अध्‍यक्ष होता हैI वह आयोग की बैठकों की अध्यक्ष्यता करते हैंI


3. आयोग का एक उपाध्यक्ष होता हैI वह आयोग का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (अर्थात् पूर्ण कालिक कार्यकारी प्रमुख) होता हैI वह केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समकक्ष पंचवर्षीय मसौदे के सूत्रीकरण और उसे प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होता हैI इसे केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्धारित समय के लिए नियुक्त किया जाता है और उसका रैंक कैबिनेट मंत्री के समान होता हैI यद्दपि वह कैबिनेट का सदस्य नहीं है, फिर भी उसे कैबिनेट की सभी बैठकों में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया जाता है (वोटिंग के अधिकार के बिना)


नीति (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग


1. यह योजना आयोग (जो शीर्ष-डाउन मॉडल पर आधारित था) को बदलने के लिए सरकार द्वारा 2015 में स्थापित किया गया है।


2. यह डाउन-अप मॉडल पर आधारित है।


3. यह संपूर्ण भारत के लिए नीति बनाने वाली संस्था है


4. आयोग के अध्यक्ष प्रधान मंत्री हैं।


5.वर्तमान उपाध्यक्ष राजीव कुमार हैं।


6. संचालन परिषद के स्थायी सदस्य-
(ए) सभी राज्य के मुख्यमंत्री
(बी) दिल्ली और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री
(सी) अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर
(डी) प्रधान मंत्री द्वारा नामित उपाध्यक्ष


राष्ट्रीय विकास परिषद


1. राष्ट्रीय विकास परिषद (एन.डी.सी) को पहली पंचवर्षीय योजना (मसौदा रूपरेखा) की संस्तुति पर भारत सरकार के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा अगस्त, 1952 में स्‍थापित किया गया थाI योजना आयोग की तरह, यह न तो एक संवैधानिक निकाय है और न ही एक वैधानिक निकायI


2. एनडीसी में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैंI 
A. भारत के प्रधानमंत्री (जो इसके अध्‍यक्ष/प्रमुख होते हैं)I 
B. केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल के सभी मंत्री (1967 से)I 
C. सभी राज्यों के मुख्य मंत्रीI 
D. सभी संघ शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री/ प्रशासकI 
E. योजना आयोग के सदस्यI


राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग


1. एन.एच.आर.सी एक वैधानिक (संवैधानिक नहीं) निकाय हैI इसे संसद द्वारा अधिनियमित एक अधिनियम अर्थात् मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 1993 में स्‍थापित किया गया था। इस अधिनियम को 2006 में संशोधित किया गया थाI


2. यह आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्‍यक्ष और चार सदस्य शामिल होते हैंI अध्‍यक्ष भारत का सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश होना चाहिएI


3. अध्‍यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा छह सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री इसके प्रमुख, लोक सभा के सभापति, राज्य सभा के उपाध्‍यक्ष, संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेता और केन्द्रीय गृह मंत्री शामिल होते हैं, की संस्तुति पर की जाती हैI इसके आलावा, भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ विचार-विमर्श करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को भी नियुक्त किया जा सकता हैI


4. अध्‍यक्ष और सदस्‍य 5 वर्ष की अवधि के लिए या 70 वर्ष की आयु पूरी होने, जो भी पहले लागू होता हो, तक पद पर रह सकते हैंI वे इसके बाद केंद्र या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैंI


केन्द्रीय सूचना आयोग (सी.आई.सी)


1. सी.आई.सी को 2005 में केंद्र सरकार द्वारा स्‍थापित किया गया थाI इसे सूचना का अधिकार (2005) के प्रावधानों के तहत आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के माध्‍यम से गठित किया गया थाI अतः, यह एक संवैधानिक निकाय नहीं हैI


2. आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और 10 से अधिक सूचना आयुक्त शामिल नहीं होते हैंI


3. उनकी नियुक्‍त एक समिति जिसमें प्रधानमंत्री, अध्‍यक्ष के तौर पर और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल का मंत्री शामिल होता है, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा की जाती हैI


4. वे सामाजिक सेवा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, मास मीडिया, प्रबंधन, पत्रकारिता, कानून या प्रशासनिक और शासन में व्‍यापक ज्ञान और अनुभाव के साथ सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्‍यक्ति होने चाहिए।


5. वे किसी भी राज्य या संघ शासित प्रदेश के सांसद या विधायक नहीं होने चाहिएI वे किसी भी अन्य लाभ के पद पर या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए या किसी भी प्रकार का व्यावसाय या किसी पेशे से जुड़े हुए नहीं होने चाहिएI


6. उनके पद का कार्यकाल 5 वर्ष की अवधि/ या सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता होI वे पुनः नियुक्ति‍ के लिए पात्र नहीं होते हैंI


7. उन्‍हें एन.एच.आर.सी के मामले में उल्लिखित स्थितियों के अनुसार केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता हैI


केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी)


1. CVC (सी.वी.सी) केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मुख्य एजेंसी हैI इसे केंद्र सरकार के एक कार्यकारी प्रस्‍ताव द्वारा 1964 में स्‍थापित किया गया था। इसकी स्थापना भ्रष्टाचार निरोध पर संथानम समिति (1962–64) की संस्‍तुति पर की गई थीI


2. इस प्रकार, वास्ताव में CVC न तो एक संवैधानिक निकाय था और ना ही एक वैधानिक निकायI सितम्बर, 2003 में, संसद द्वारा अधिनियमित एक कानून के तहत सी.वी.सी को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गयाI


3. CVC (सी.वी.सी) एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्‍यक्ष) और दो से अधिक सतर्कता आयुक्त शामिल नहीं होते हैंI


4. इनकी नियुक्ति तीन सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री प्रमुख के तौर पर और गृह मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता शामिल होते हैं, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा हस्‍ताक्षर तथा मोहर सहित जारी अधिपत्र द्वारा की जाती हैI


5. उनका कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता होI उनके कार्यकाल के बाद, वे केंद्र सरकार या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैंI

Friday, 14 June 2019

भारत के सभी राष्ट्रपतियों की सूची, कार्यकाल एवं उनका राजनीतिक सफर


राष्ट्रपति को भारत में प्रथम नागरिक माना जाता है. यह देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है. निर्वाचक मंडल भारत के राष्ट्रपति का चुनाव करता है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना भारत में कोई भी कानून लागू नहीं हो सकता है. इस लेख के माध्यम से अब तक जितने राष्ट्रपति चुने गए है उनकी सूची दी जा रही है और साथ ही उनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का विवरण दिया जा रहा है.

राष्ट्रपति का चुनाव संसद और राज्य के विधानमंडल के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता हैं. निर्वाचक मंडल भारत के राष्ट्रपति का चुनाव करता है और इनके सदस्यों का प्रतिनिधित्व अनुपातिक होता है. उनका वोट सिंगल ट्रांसफीरेबल होता है और उनकी दूसरी पसंद की भी गिनती होती है. राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना भारत में कोई भी कानून लागू नहीं हो सकता है.

भारत के सभी राष्ट्रपतियों की सूची, कार्यकाल एवं उनका राजनितिक सफर

1. डॉ राजेन्द्र प्रसाद

Dr. Rajendra Prasad

भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने दो कार्यकालों तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया. वे संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे और भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन के प्रमुख नेता. उनको 1962 में भारत रत्न दिया गया था.

2. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

Radhakrishnan Sarvapalli

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888को हुआ था और इसी दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. उनको 1954 में भारत रत्न दिया गया था.

3. डॉ जाकिर हुसैन

Dr Zakir Hussain

डॉ जाकिर हुसैन भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति बनें और इनकी मृत्यु पद पर रहते ही हुई थी. तात्कालिक उपराष्ट्रपती वी.वी गीरि को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्लाह 20 जुलाई 1969 से 24 अगस्त 1969 तक कार्यवाहक राष्ट्रपति बने. यह भारत के सबसे प्रसिद्ध तबला वादक थे.

मोहम्मद हिदायतुल्लाह को 2002 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. इनको भारत में शिक्षा की क्रांति लाने के लिए भी याद किया जाता है. इनके नेतृत्व में राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया स्थापित किया गया था.

4. वी वी गिरि

V.V Giri

वी. वी गिरी भारत के चौथे राष्ट्रपति थे. इनका पूरा नाम वराहगिरी वेंकटगिरी है. इनके समय में दुसरे चक्र की मतगणना करनी पड़ी थी. यह पहले भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे थे. 1975 में उनको भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

5. फखरुद्दीन अली अहमद

Fakhruddin Ali Ahmed

फखरुद्दीन अली अहमद भारत के पांचवे राष्ट्रपति थे. दुसरे राष्ट्रपति जिनकी मृत्यु राष्ट्रपति के पद पर ही हो गई थी. बी.डी जत्ती को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था.

6. नीलम संजीव रेड्डी

Nilam Sanjeev Reddy

भारत के छठे राष्ट्रपति बने और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. वे भारत के ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति के उम्मीदवार होते हुए प्रथम बार विफलता प्राप्त हुई और दूसरी बार उम्मीदवार बनाए जाने के बाद वह राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हुए थे.

7. ज्ञानी जैल सिंह

Giani Zail Singh

राष्ट्रपति बनने से पहले वे पंजाब के मुख्यमंत्री और केंद्र में भी मंत्री रहे थे. भारतीय डाक घर से संबंधी विधेयक पर उन्होंने पॉकेट वीटो का भी प्रयोग किया था. उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में बहुत सी घटनाये घटी जैसे ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गाँधी की हत्या और 1984में सिख विरोधी दंगा.

8. आर. वेंकटरमण

R Venkataraman

आर. वेंकटरमण 1984 से 87 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे थे. वे एक भारतीय वकील, स्वतंत्रता संग्रामी और महान राजनेता थे. उन्होंने अपने राष्ट्रपति काल में सर्वाधिक प्रधानमंत्री को उनकी पद की शपथ दिलाई थी. 

9. डॉ शंकर दयाल शर्मा

Dr Shanker Dayal Sharma

वे अपने राष्ट्रपति पद से पहले, भारत के आठवें उप राष्ट्रपति थे. 1952 से 56 तक वे भोपाल के मुख्य मंत्री रहे थे और 1956 से 67 तक कैबिनेट मिनिस्टर. इंटरनेशनल बार एसोसिएशन ने उनको लीगल प्रोफेशन में बहु-उपलब्धियों के कारण ‘लिविंग लीजेंड ऑफ़ लॉ अवार्ड ऑफ़ रिकग्निशन’ दिया था.

10. के. आर. नारायणन

K R Narayanan

के. आर. नारायणन भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति तथा प्रथम मलयाली व्यक्ति थे जिन्हें देश का सर्वोच्च पद प्राप्त हुआ था. वे लोकसभा चुनाव मतदान करने वाले तथा राज्य की विधानसभा को सम्बोधित करने वाले पहले राष्ट्रपति थे.

11. डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

Abdul Kalam

डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत के मिसाईल मेन नाम से भी जाने जाते हैं. वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने राष्ट्रपति पद को संभाला और भारत के पहले राष्ट्रपति जो सर्वाधिक मतों से जीते थे. उनके निर्देशन में रोहिणी-1 उपग्रह, अग्नि और पृथ्वी मिसाइलो का सफल प्रक्षेपण किया गया था. यहा तक कि 1974 एवं 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था. 1997 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

12. श्रीमती प्रतिभा सिंह पाटिल

Pratibha Singh Patil

वह राष्ट्रपति बनने से पहले राजस्थान की राज्यपाल रहीं थी. 1962 से 85 तक वह पांच बार महाराष्ट्र की विधानसभा की सदस्य रही और 1991 में लोकसभा के लिए अमरावती से चुनी गई थी. इतना ही नहीं वह सुखोई विमान उड़ाने वाली पहली महिला राष्ट्रपति भी हैं.

13. प्रणब मुखर्जी

Pranab Mukherjee

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से पहले केंद्र सरकार में वित्त मंत्री के पद पर थे. उनको 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार एवं 2008 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा असैनिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया गया था.

14. राम नाथ कोविंद

Ram Nath Kovind

राम नाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था. वह एक वकील और राजनेता हैं. वे भारत के 14वें और वर्तमान राष्ट्रपति हैं. राम नाथ कोविंद 25 जुलाई, 2017 को राष्ट्रपति बने और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे. राष्ट्रपति बनने से पहले वे बिहार के पूर्व गवर्नर थे. राजनीतिक समस्याओं के प्रति उनके दृष्टिकोण ने उन्हें राजनीतिक स्पेक्ट्रम में प्रशंसा दिलाई. एक राज्यपाल के रूप में, उनकी उपलब्धियां विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच के लिए न्यायिक आयोग का निर्माण करना था.

Friday, 17 May 2019

नीति आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य

नीति आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य


1. नीति आयोग भारत सरकार द्वारा 1 जनवरी, 2015 को गठित एक नई संस्‍थान है जिसे योजना आयोग के स्‍थान पर बनाया गया है।


2. योजना आयोग के स्‍थान पर नई संस्‍था लाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 15 अगस्‍त, 2014 को लाल किले से अपने संबोधन में की थी।


3. नीति आयोग एक गैर संवैधानिक निकाय है।


4. नीति आयोग का पूर्ण रूप ‘राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान’ (NITI – National Institution for Transforming India) है।


5. नीति आयोग (मुख्‍यालय दिल्‍ली) भारत सरकार का थिंक टैंक है।


6. नीति आयोग, योजना आयोग की तरह कोई वित्‍तीय आवंटन नहीं करता है।


7. नीति आयोग का प्राथमिक कार्य, सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों पर सरकार को सलाह देने का है ताकि सरकार ऐसी योजना का निर्माण करे जो लोगों के हित में हो।


8. नीति आयोग के लिए 13 सूत्री उद्देश्‍य रखे गये हैं।


9. नीति आयोग की संरचना में अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष, सीईओ (CEO), पूर्णकालिक सदस्‍य (Full Time Member), पदेन सदस्‍य (Ex-Officio Members), शासी परिषद् तथा विशेष आमंत्रित सदस्‍य शामिल है।


10. नीति आयोग का अध्‍यक्ष प्रधानमंत्री होता है।


11. नीति आयोग के अध्‍यक्ष (प्रथम) नरेन्‍द्र मोदी है।


12. नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष की नियुक्ति प्रधानमंत्री करता है।


13. उपाध्‍यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्‍त होता है।


14. सीईओ भारत सरकार के सचिव स्‍तर के अधिकारी होते है जिसे निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्‍त किया जाता है।


15. नीति आयोग के प्रथम उपाध्‍यक्ष अरविन्‍द्र पनगडि़या थे।


16. नीति आयोग के प्रथम सीईओ सिन्‍धुश्री खुल्‍लर थे।


17. पूर्णकालिक सदस्‍यों की संख्‍या 5 होती है जिन्‍हें राज्‍य मंत्री के बराबर दर्जा प्राप्‍त होता है।


18. पदेन सदस्‍य की अधिकतम संख्‍या चार होती है जो प्रधानमंत्री द्वारा नामित होते हैं।


19. शासी परिषद् (Governing Council) में भारत के सभी मुख्‍यमंत्री और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के राज्‍यपाल / प्रशासक शामिल होते हैं।


20. विशेष आमंत्रित सदस्‍य में विभिन्‍न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं जिन्‍हें प्रधानमंत्री द्वारा नामित किया जाता है।


21. नीति आयोग के क्रियान्‍वयन का दायित्‍व केन्‍द्र सरकार और राज्‍य सरकार पर होता है।


22. योजनाओं को अंतिम स्‍वीकृति राष्‍ट्रीय विकास परिषद् (NDC) देता है


23. नीति आयोग के वर्तमान अध्यक्ष – नरेंद्र मोदी


24. नीति आयोग के वर्तमान उपाध्यक्ष – डाँ राजीव कुमार


25. नीति आयोग के वर्तमान CEO – अभिताभ कांत


26. नीति आयोग के वर्तमान पूर्ण्कालिक सदस्य – रमेंश चंद , बी के सारस्वत , विवेक देवराय , डाँ वी के पाल


Tuesday, 14 May 2019

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक अवलोकन

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक अवलोकन


अवलोकन, संक्षिप्त इतिहास और भारतीय संविधान का विकास


ब्रिटिश प्रशासन को मोटे तौर पर दो चरणों में बांटा जा सकता है, वह है


(1) कंपनी प्रशासन (1773-1857)
(2) क्राउन प्रशासन (1858-19 47)


निम्नलिखित महत्वपूर्ण अधिनियम, नियम और विकास हैं जो की वर्तमान भारतीय राजनीति के विकास की ओर अग्रसर हैं।


कंपनी प्रशासन


अधिनियम विनियमन - 1773


(1) 'गवर्नर' का पद अब 'गवर्नर-जनरल' बनाया गया है और बंगाल ऐसा पहला प्रांत था जहा के पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे, उन्हें चार सदस्यों की कार्यकारी परिषद ने सहायता प्रदान की।
(2) कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीशों के साथ हुई थी। सर एलीया इंपी मुख्य न्यायाधीश थे


पिट्स इंडिया एक्ट - 1784


(1) भारत में राजनीतिक मामलों का प्रबंधन करने के लिए एक और संगठन- 'नियंत्रण का बोर्ड' बनाया गया। हालांकि निदेशक मंडल को वाणिज्यिक मामलों के प्रबंध करने के लिए रखा गया ।
(2) इस प्रकार, कंपनियों के अधिकार को पहली बार 'भारत में ब्रिटिश अधिकार' नाम कहा गया और वाणिज्यिक शाखा का नेतृत्व निदेशक मंडल और राजनीतिक दल का नेतृत्व नियंत्रण मंडल कर रहे है।
(3) इस अधिनियम को तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री विलियम पिट ने पेश किया था


चार्टर अधिनियम - 1813: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक अधिकारों के एकाधिकार को समाप्त किया और अन्य कंपनियों को भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों में भाग लेने की इजाजत दी।


चार्टर अधिनियम - 1833


(1) बंगाल के गवर्नर जनरल के पद के स्थान पर भारत के गवर्नर जनरल पद बनाया गया। मद्रास और बॉम्बे की अध्यक्षताएं विधायी शक्तियों के साथ उनसे ले ली गयी और कलकत्ता की अध्यक्षता के अधीन कर दिया गया। विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर जनरल थे।
(2) इस अधिनियम ने पूरी तरह से कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियों को समाप्त कर दिया। कंपनी अस्तित्व में थी, लेकिन यह एक विशुद्ध प्रशासनिक और राजनीतिक संगठन बन गई थी।


चार्टर अधिनियम - 1853


(1) एक अलग गवर्नर जनरल की विधान परिषद की स्थापना की गयी।
(2) भारतीयों के लिए सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता प्रणाली का परिचय किया गया। इस उद्देश्य के लिए मैकाले समिति का गठन हुआ (1854) सत्यसेन नाथ टैगोर 1863 में उस सेवा को पास करने वाले पहले भारतीय बन गए।
(3) नोट - भारत में सिविल सेवा के पिता - लॉर्ड चार्ल्स कोनवलिस क्योंकि उनके भारत में नागरिक सेवाओं के आधुनिकीकरण के प्रयासों के कारण।


क्राउन प्रशासन


1858 भारत सरकार अधिनियम


(1) इसे भारत की अच्छी सरकार के अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है।
(2) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया मुगल प्रशासन को भी समाप्त कर दिया गया।
(3) गवर्नर जनरल के पद को समाप्त कर दिया और एक नया पोस्ट वायसरॉय बनाया। लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बनाये गये।
(4) इसके अलावा भारत के लिए सचिव-राज्य बनाया गया और इनकी मदद के लिए 15-सदस्यीय परिषद बनायीं गयी। यह सदस्य ब्रिटिश संसद के सदस्य थे।


भारतीय परिषद अधिनियम 1861


(1) वाइसराय की कार्यकारी परिषद का विस्तार किया गया। कुछ भारतीयों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नामांकित करने के लिए उनके लिए प्रावधान किए गए। लॉर्ड कैनिंग ने बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को नामांकित किया।
(2) बंगाल के लिए नई विधान परिषदें (1862), उत्तरपश्चिमी सीमावर्ती प्रांत (1866) और पंजाब (1897) की स्थापना हुई।


भारतीय परिषद अधिनियम 1892


(1) तत्कालीन भारत में बजट चर्चा का अधिकार विधायी परिषद को दिया गया।
(2) बढाई गयी परिषदों और कुछ सदस्यों को केंद्र क साथ साथ प्रांतीय विधान परिषद में नामांकित किया जा सकता है।


भारतीय परिषद अधिनियम 1909


(1) यह अधिनियम मॉर्ले-मिंटो सुधार के रूप में भी जाना जाता है।
(2) केन्द्रीय विधान परिषद में सदस्यों की संख्या 16 से बढ़कर 60 की गयी।
(3) सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए कानून सदस्य के रूप में नामांकित होने वाले पहले भारतीय बने।
(4) सांप्रदायिक मतदाता पेश किया गया था। मुस्लिमों को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए अलग प्रतिनिधित्व दिया गया। इसलिए, मिंटो को 'सांप्रदायिक मतदाता के पिता' के रूप में भी जाना जाता है।


भारत सरकार अधिनियम 1919


(1) यह अधिनियम मोंटेग-चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है और यह 1921 में लागू हुआ था।
(2) यहा केन्द्रीय और प्रांतीय विषयों या सूचियों को पेश किया गया जहां वे अपने संबंधित सूचियों को कानून तैयार कर सकते थे। प्रांतीय विषयों को हस्तांतरित और आरक्षित में विभाजित किया गया था। इस प्रकार, इस अधिनियम ने दोहरा शासन की शुरुआत कि।
(3) द्विसदन और प्रत्यक्ष चुनाव शुरू किए गए।


भारत सरकार अधिनियम 1935


(1) इकाइयों के रूप में प्रांतों और रियासतों के साथ अखिल भारतीय संघ की स्थापना की गयी। महासंघ कभी भी अस्तित्व में नहीं आया क्योंकि रियासतों ने इसे शामिल नहीं किया था।
(2) प्रांतों में समाप्त हुई दोहरा शासन और इसके स्थान पर 'प्रांतीय स्वायत्तता' पेश की। लेकिन केंद्र में यह दोहरा शासन शुरू किया; हालांकि वह कभी भी अस्तित्व में नहीं आया था।
(3) साथ ही साथ उदास वर्गों के लिए अलग-अलग मतदाताओं के साथ-साथ प्रान्तों में द्विसदन भी शुरू किया।
(4) केंद्र में आरबीआई और एक संघीय अदालत की स्थापना की गयी।


भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947


(1) विभाजन योजना या माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) देश के विभाजन और आथली घोषणा (20 फरवरी 1947) को देश को स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए प्रभाव देना था।
(2) भारत और पाकिस्तान के दो स्वतंत्र आधिकारिक रूप से निर्मित किये गये, ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया और अपने स्वतंत्र संविधानों को तैयार करने के लिए दो स्वतंत्र राष्ट्रों के घटक विधानसभा को अधिकृत किया।
(3) भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को 18 जुलाई, 1947 को शाही सहमति मिली।

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