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Thursday, 12 November 2020

सुर्ख़ियों में- बाइडन की जीत और भारत ?

सुर्ख़ियों में- बाइडन की जीत और भारत ?
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👉 बाइडन की जीत के भारत के सन्दर्भ में सकारात्मक व नकारात्मक परिणामl

➡️ अमेरिका में हाल ही में राष्ट्रपति चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बाइडेन व उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस की जीत ने वैश्विक राजनीति में बदलाव के संकेत दिये है। डेमोक्रेटिक पार्टी की बाइडेन-हैरिस की जोड़ी ने रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप और माइक पेंस की जोड़ी को हराया है।

➡️ चुनावी नतीजों के बाद अब विभिन्न देशों को अपनी “अमेरिका के सन्दर्भ में विदेश नीति” को डेमोक्रेटिक पार्टी की “उदार मगर चालाकी से भरी विदेश नीतियों” से सामंजस्य बिठाना होगा। रिपब्लिकन पार्टी की विदेश नीति में स्पष्टत: आक्रमकता मिलती है, मगर चालाकी नहीं जो की डेमोक्रेट से अलग है। 

➡️ मगर अब यह नीति भारत के सन्दर्भ में देखी जा रही है, क्योंकि वर्तमान भारत सरकार व ट्रम्प सरकार का रूख चीन के प्रति तथा अन्य राष्ट्रवादी नीतियों के प्रति आक्रमक रहा जो अब बाइडन की जीत के साथ कमजोर होता नजर आ सकता है। 
जानते हैl

बाइडन की जीत के सकारात्मक व नकारात्मक पक्ष जो भारत को स्पष्टत: प्रभावित करेंगे।

जीत के सकारात्मक पक्ष 
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➡️ ओबामा प्रशासन के दौरान 'एशिया पैसिफिक' पर एक विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में जो पहल शुरू की थी वो पुन: प्रभावी होने की सम्भावना हो सकती है।

➡️ बाइडेन सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करेंगे, साथ ही अधिक क्षेत्रों में संबंधों के विस्तार का लक्ष्य रखेंगे।

➡️ भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को रीसेट करने के लिए जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफ्रेंसेस (जीएसपी) की स्थिति को बहाल करना होगा।

➡️ भारत में चमड़े, आभूषण और इंजीनियरिंग जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों में 2,167 उत्पादों पर शून्य या कम टैरिफ के जरिए तरजीह वाले बर्ताव का फायदा मिलेगा।

➡️ चीन के सन्दर्भ में भारत और अमेरिका सप्लाई चेन की लचीलेपन की जरूरत को मान्यता देंगे जो व्यापक व्यापार समझौते पर सुधार को दिखाता है।

➡️ बाइडेन प्रशासन ने 2018 में डोनाल्ड ट्रम्प के छोड़े गए ईरान परमाणु समझौते पर फिर से गौर किया जा सकता है। 2015 की संयुक्त व्यापक योजना (जेसीपीओए) में फिर से प्रवेश करना बाइडेन प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकता में से एक है।

➡️ बाइडेन प्रशासन पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को चाबहार परियोजनाओं पर बढ़ने और अफगानिस्तान के लिए रणनीतिक मार्गों को सुरक्षित करने की अनुमति देगा।

➡️ बाइडेन प्रशासन जलवायु न्याय की बात कर रहा है जो पर्यावरण की चुनौतियों के मामले में विकासशील देशों को लेवल प्लेइंग फील्ड देने के लिए अमेरिका की अहम भूमिका को बढ़ावा देगा। 5 नवंबर को अमेरिका आधिकारिक तौर पर ‘पेरिस समझौते’ से बाहर आ गया।


जीत के नकारात्मक पक्ष
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➡️ बाइडेन प्रशासन रूस के मुद्दे पर अधिक कड़ा रुख, चीन के साथ कुछ समय के लिए मामूली सहयोग की संभावना जबकि भारत-चीन तनाव उफान की पिच पर हैं, यह सभी आने वाली चुनौतियों को हाइलाइट करता है।

➡️ चीन के साथ चल रहे व्यापार युद्ध को बाइडेन-हैरिस प्रशासन द्वारा सुलझाने का प्रयास किया जायेगा जो चीन छोड़ने वाली अमेरिकी कम्पनियों के लिए भारत में स्थापित होने की प्रबलता को कम कर देगा।

➡️ बाइडेन-हैरिस प्रशासन द्वारा चीन के साथ मधुर संबंधों की स्थिति बनाये जाना भारत को चीन के संदर्भ में कमजोर कर सकता है जो की डेमोक्रेट की कमजोर कड़ी होगी।

➡️ मोदी प्रशासन और बिडेन-हैरिस प्रशासन के बीच “मानवाधिकार से जुड़ा फ्रंट” कमजोर कड़ी है, जिसकों डेमोक्रेट भारत की कमजोर कड़ी मानते है।

➡️ कमला हैरिस और प्रमिला जयपाल ने भारत के जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने, उसके बाद इंटरनेट पाबंदियों और राजनीतिक गिरफ्तारियों की आलोचना की थी जो हैरिस की जीत को भारत के सन्दर्भ में शंका वाला बनता है।

➡️ भारत में NGOs को फंडिंग के संबंध में भारत के नए नियमों पर बाइडेन-हैरिस प्रशासन किस तरह की प्रतिक्रिया देगा, ये भी एक चिंता का विषय है।

➡️ बाइडेन-हैरिस प्रशासन कोविड-19 महामारी से निपटने हेतु घरेलू मुद्दों को ठीक करने के लिए सबसे पहले ध्यान देगा न की वैश्विक मुद्दों को।

Friday, 19 July 2019

वैज्ञानिक नाम

• मनुष्य का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमो सैपियंस
• मेढक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- राना टिग्रिना
• बिल्ली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फेलिस डोमेस्टिका
• चूहा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Rattus
छिपकली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Lacertilia
• कुत्ता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनिस फैमिलियर्स
• गाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस इंडिकस
• भैँस का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बुबालस बुबालिस
• बैल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस प्रिमिजिनियस टारस
• बकरी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- केप्टा हिटमस
• भेँड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ओवीज अराइज
• सुअर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुसस्फ्रोका डोमेस्टिका
• शेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा लियो
• बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा टाइग्रिस
• चीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा पार्डुस
• भालू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- उर्सुस मैटिटिमस कार्नीवेरा
• खरगोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस
• हिरण का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सर्वस एलाफस
• ऊँट का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैमेलस डोमेडेरियस
• लोमडी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनीडे
• लंगूर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमिनोडिया
• बारहसिंगा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रुसर्वस डुवाउसेली
• मक्खी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मस्का डोमेस्टिका
• मोर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैवो क्रिस्टेटस
• हाथी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एफिलास इंडिका
• डॉल्फिन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्लैटिनिस्ट गैंगेटिका
• घोड़ा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ईक्वस कैबेलस
• गधा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- इक्विस असिनस
• आम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मैग्नीफेरा इंडिका
• अंगुर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- विटियस
• संतरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस सीनेन्सिस
• नारियल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोको न्यूसीफेरा
• सेब का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मेलस प्यूमिया/डोमेस्टिका
• अनानास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- आननास कॉमोजस
• पपीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैरीका पपीता
• नाशपाती का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइरस क्यूमिनिस
• केला का वैज्ञानिक नाम क्या है?- म्यूजा पेराडिसिएका
• लीची का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लीची चिन्नीसिस
• इमली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- तामार इंडस इंडिका
• खीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुसुमिस सैटिवस
• बेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ज़िज़ीफस मौरीतियाना
• चुकंदर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बीटा वाल्गारिस
• जामुन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- शायजियम क्यूमिनी
• गन्ना का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुगरेन्स औफिसीनेरम
• मक्का का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिया मेज
• बाजरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पेनिसिटम अमेरीकोनम
• धान का वैज्ञानिक नाम क्या है?- औरिजया सैटिवाट
• गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ट्रिक्टिकम एस्टिवियम
• कपास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- गैसीपीयम
• सरसोँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रेसिका कम्पेस्टरीज
• कॉफी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कॉफिया अरेबिका
• चाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- थिया साइनेनिसस
• तुलसी का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- ऑक्सीमेन्ट टेन्यूफ़्लोरम
• एलोविरा का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- एलोविरा
• अफीम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पपवर सोम्निफेरुम
• काजू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एनाकार्डियम अरोमैटिकम
• बादाम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्रुनस अरमेनिका
• मुंगफली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एरैकिस हाइजोपिया
• लालमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैप्सियम एनुअम
• कालीमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइपर नाइग्रम
• केसर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्रोकस सैटिवियस
• सौफ (Fennel) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़ीनिकुलम वल्गेरे
• जीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्यूमीनियम सिमिनियम
• हल्दी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुरकुमा लोँगा
• नीबू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस लिंबोन
• आंवला(gooseberry) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़िलेन्थस इम्ब्लिका
• धनिया का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोरियेंडम सटिवुम
• टमाटर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लाइकोप्रेसिकन एस्कुलेँटम
• पालक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- स्पिनिया ओलेरसाइए
• बैगन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एकोनिटियम हेटरोफिलम
• फूलगोभी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रासिका औलिरेशिया
• अदरक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिँजिबर ऑफिसिनेल
• लहसून का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एलियम सेराइवन
• गाजर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- डाकस कैरोटा
• मूली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रेफेनस सैटाइविस

Monday, 15 July 2019

कश्‍मीर पर UNHRC की रिपोर्ट

जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की एक रिपोर्ट से भारत सख्‍त नाराज है। वहीं पाकिस्‍तान इस पर इतराया हुआ है। भारत ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत करार दिया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठ और राजनीति से प्रेरित है। भारत का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इस रिपोर्ट को बनाते समय सीमा पार से जारी आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी की है। भारत ने लिखित में ओएचसीएचआर के समक्ष इस रिपोर्ट को लेकर एतराज जताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि रिपोर्ट में कही गई बातें भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती हैं। यह लोकतांत्रिक भारत की आतंकवाद समर्थक देश से बराबरी करने की काल्पनिक कोशिश है। ओएचसीएचआर ने कश्मीर पर पहले भी अप्रेल में एक रिपोर्ट जारी की थी। मौजूदा रिपोर्ट इसकी ही अगली कड़ी है जिसमें दावा किया है कि भारत ने उसकी चिंताओं पर ठोस कदम नहीं उठाया है।यह रिपोर्ट ऐसे समय पर सामने आई है जब एक दिन पहले ही आतंकी बुरहान वानी की बरसी थी। इस बरसी पर पाकिस्‍तान सेना के प्रवक्‍ता ने उसको हीरो करार दिया। इतना ही नहीं पाकिस्‍तान में इस आतंकी पर फिल्‍म तक बन रही है जिसमें पाकिस्‍तान के टॉप के हीरो बुरहान का किरदार निभा रहे हैं। इस रिपोर्ट को बनाते समय संयुक्‍त राष्‍ट्र ने  कश्‍मीर में पत्‍थरबाजी की घटनाएं, स्‍कूलों को जलाए जाने की घटनाएं, जवानों पर हुए आतंकी हमलों की घटनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में या इससे पहले की भी कई रिपोर्ट में कश्‍मीर के उन पंडि़तों को भी नजरअंदाज किया गया जो कभी यहां के वाशिंदे हुआ करते थे और जिन्‍हें आतंकवाद ने घर छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया।

रिपोर्ट के कुछ खास बिंदु

OHCHR द्वारा जारी रिपोर्ट की दूसरी कड़ी ने भारत की परेशानी को बढ़ाने का काम किया है। जिस रिपोर्ट पर भारत इतना सख्‍त हुआ है उसमें सिर्फ कश्‍मीर को ही लेकर कई तरह की बातें नहीं की गई हैं, बल्कि इसमें तुर्की समेत वेनेजुएला में भी मानवाधिकार हनन की बात भी कही गई है। इसमें यूएन अधिकारियों को जम्‍मू कश्‍मीर में भेजे जाने की इजाजत न देने के लिए भारत की आलोचना भी की गई है। इसमें कहा गया है कि यह रिपोर्ट स्‍थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर के अंत तक OHCHR ने खराब होते मानवाधिकार हालातों के मद्देनजर बीते दिसंबर के अंत तक करीब 77 फील्‍ड प्रजेंस दी। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्यों को वहां पर सहायता प्रदान की गई। यह सहायता वहां पर मौजूद अधिकारी के माध्‍यम से दी गई।इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि वहां की सरकार ने खराब होते मानवाधिकारों पर कोई सकारात्‍मक रवैया नहीं अपनाया या उसे खारिज कर दिया। वहीं इसमें यह भी कहा गया है कि OHCHR ने कश्‍मीर, तुर्की और वेनेजुएला में खराब होती मानवाधिकार की हालात पर करीब से नजर रखी है। यहां के लोगों, पीडि़तों और चश्‍मदीदों से मिली जानकारी के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कंट्रोल वाले कश्‍मीर में कई बार हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले हैं। वर्ष 2016 के मध्‍य में यूएन हाई कमिश्‍नर ने भारत और पाकिस्‍तान दोनों से ही वहां के हालातों को जानने और निष्‍पक्ष जांच करने को लेकर इजाजत मांगी थी। लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों तरफ किसी ने भी इस तरह की इजाजत नहीं दी। जून में जारी एक फाइंडिंग रिपोर्ट में OHCHR ने कश्‍मीर में भारत की तरफ से तैनात की गई फौज और वहां पर सेना द्वारा नागरिकों के मारे जाने या घायल करने, जबरन हिरासत में लेने, नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किए जाने का जिक्र किया था। इतना ही नहीं यहां लोग आपस में संदेश न भेज सकें इसके लिए भी कम्‍यूनिकेशन ब्‍लैकआउट किया गया था।14 जून की इस रिपोर्ट को जहां भारत ने खारिज किया वहीं पाकिस्‍तान ने इसका समर्थन किया था। इसमें कहा गया कि यह रिपोर्ट पूरे विश्‍व का ध्‍यान कश्‍मीर में हो रहे मानवाधिकार के हनन की घटनाओं पर केंद्रित करने में कामयाब रही। इस रिपोर्ट का भारत और पाकिस्‍तान में मौजूद कश्‍मीर के अन्‍य दावेदारों और नेताओं ने भी समर्थन किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर में OHCHR ने 15 लोगों के लिए पांच दिनों का ह्यूमन राइट्स मॉनीटरिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था। इसमें मानवाधिकार से जुड़े कार्यकर्ता और वकील शामिल थे। इस प्रोग्राम के दौरान कई मानवाधिकार हनन के कई मामले सामने आए। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने वाले लोगों का कहना था कि कश्‍मीर पर रिपोर्ट को व्‍यापक विश्‍लेषण के तौर पर पूरी दुनिया के समक्ष रखा जाना चाहिए।

Saturday, 25 May 2019

प्रमुख क्रान्तियाँ

प्रमुख क्रान्तियाँ

🎾 हरित क्रांति -- खाद्यान्न उत्पादन

🍼 श्वेत क्रांति -- दुग्ध उत्पादन

🐬 नीली क्रांति -- मत्स्य उत्पादन

🎾 भूरी क्रांति -- उर्वरक उत्पादन

🐓 रजत क्रांति -- अंडा उत्पादन

🌾 पीली क्रांति -- तिलहन उत्पादन

🌵 कृष्ण क्रांति -- बायोडीजल उत्पादन

🍒 लाल क्रांति -- टमाटर/मांस उत्पादन

🐋 गुलाबी क्रांति -- झींगा मछली उत्पादन

🍟 बादामी क्रांति -- मासाला उत्पादन

🍊 सुनहरी क्रांति -- फल उत्पादन

🌊 अमृत क्रांति -- नदी जोड़ो परियोजनाएं

🏨 धुसर/स्लेटी क्रांति-- सीमेंट

🍈 गोल क्रांति-- आलु

🌈 इंद्रधनुषीय क्रांति-- सभी क्रांतियो पर निगरानी रखने हेतु

🌅 सनराइज/सुर्योदय क्रांति-- इलेक्ट्रॉनिक उधोग के विकास के हेतु

🏌 गंगा क्रांति-- भ्रष्टाचार के खिलाफ सदाचार पैदा करने हेतु (जोहड़े वाले बाबा/वाटर मैन ऑफ इंडिया/राजेन्द्र सिंह )द्वारा

🎾 सदाबहार क्रांति-- जैव तकनीकी

🌭 सेफ्रॉन क्रांति-- केसर उत्पादन से

🛍 स्लेटी/ग्रे क्रांति--उर्वरको के उत्पादन से

🎋 हरित सोना क्रांति-- -- बाँस उतपादन से

🍡 मूक क्रांति-- मोटे अनाजों के उत्पादन से

🍠 परामनी क्रांति-- भिन्डी उत्पादन से

☕ ग्रीन गॉल्ड क्रांति-- चाय उत्पादन से

👳‍♀ खाद्द श्रंखला क्रांति-- भारतीय कृषकों की 2020 तक आमदनी को दुगुना करने से

🎾 खाकी क्रांति-- चमड़ा उत्पादन से

🌾 व्हाइट गॉल्ड क्रांति-- कपास उत्पादन से (तीसरी क्रांति)

🚧 N.H.क्रान्ति- स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से

Monday, 20 May 2019

प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

मानव इतिहास में ऐसे कई प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में ही वह प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त किया है, जो मरने के बाद भी कई व्यक्तियों को नसीब नहीं होती है। इन्हीं प्रसिद्धियों में से एक है- किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर डाक टिकट जारी होना। भारत में भी कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस लेख में हम उन प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों का विवरण दे रहे हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं।

TARGET ADDA COVERAGE

1. सचिन तेंडुलकर

Sachin Tendulakar Stamp

योगदान: उन्हें सर्वकालिक महानतम बल्लेबाज माना जाता है. उनके नाम एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट दोनों में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड है। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में 100 शतक बनाने वाले एकमात्र खिलाड़ी और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में दोहरा शतक बनाने वाले वह पहले खिलाड़ी थे। इसके अलावा वह एकमात्र खिलाड़ी हैं जिनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30,000 से अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड है।

सम्मान: उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री, 2008 में पद्म विभूषण पुरस्कार, और 16 नवंबर 2013 को भारत रत्न प्रदान किया गया था। वह ऐसे आठवें भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया है।

2. मदर टेरेसा

Mother Taresa Stamp

योगदान: वह एक रोमन कैथोलिक भक्तिन (Nun) थी जिन्होंने दुनिया भर के गरीब और निराश्रित (20 वीं सदी की महान मानवतावादी) की सेवा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था (20 वीं सदी की महान मानवतावादी)।

सम्मान: उन्हें 1962 में पद्मश्री और 1980 में भारत रत्न (भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार) प्रदान किया गया था। भारत सरकार ने 28 अगस्त, 2010 को उनके नाम पर 5 रूपए का विशेष सिक्का जारी किया था। वह ऐसी सातवीं भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था।

3. राजीव गांधी

Rajiv Gandhi Stamp

योगदान: वह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। उन्होंने भारतीय संचार प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया था, जिसके कारण वर्तमान समय में भारत संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सम्मान: उन्हें 1991 में भारत रत्न मिला और 2009 में (भारत नेतृत्व सम्मेलन में) आधुनिक भारत के क्रांतिकारी नेता का पुरस्कार मिला। वह ऐसे छट्ठे भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था।

4. वी वी गिरि

VV Giri Stamp

योगदान: वह भारत के चौथे तथा स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुना जाने वाला एकमात्र राष्ट्रपति हैं। वह भारत के व्यापार संघ आंदोलन में अग्रणी थे और उनके अथक प्रयासों के कारण ही श्रम बल मांग और उनके अधिकारों का अधिग्रहण हो सका।

सम्मान: उन्हें 1975 में भारत रत्न का पुरस्कार मिला और वह ऐसे पाचवे भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था। 1995 में इनके के सम्मान में राष्ट्रीय श्रम संस्थान का नाम बदलकर वी वी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान रखा गया था।

5. डॉ. एस. राधाकृष्णन

Dr. S Radhakrishan Stamp

योगदान: वह एक भारतीय दार्शनिक और राजनेता थे। भारत के पहले उपराष्ट्रपति और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे।

सम्मान: उन्हें 1932 में नाइटहुड, 1954 में भारत रत्न, और 1963 में ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट की मानद सदस्यता से नवाजा गया था। वह ऐसे चौथे भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था।

6. डॉ. राजेंद्र प्रसाद

Dr. Rajendra Prasad

योगदान: वह स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे और भारत गणराज्य को सही आकार देने वाले राजनितिक वास्तुकारो में से एक थे।

सम्मान: उन्हें 1962 में भारत रत्न प्रदान किया गया था और ऐसे तीसरे भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था।

7. डॉ. एम. विस्वेसरैया

Visvesaraiya Stamp

योगदान: वह एक प्रख्यात भारतीय इंजीनियर के रूप में जाने जाते हैं और मंड्या जिले में कृष्णा राज सागर बांध के निर्माण के साथ-साथ हैदराबाद शहर के लिए बाढ़ संरक्षण प्रणाली के प्रमुख डिजाइनरों में से एक थे।

सम्मान: उन्हें 1955 में भारत रत्न तथा 1915 में ब्रिटेन ने नाइटहुड की उपाधि पुरस्कार से नवाजा था। इनके सम्मान में औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय, बैंगलोर का नाम बदलकर विश्वेश्वराय औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय रख दिया गया था । वह ऐसे दुसरे भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था।

8. डॉ. डी.के कर्वे (महर्षि कर्वे)

Dr DK Karve Stamp

Source: www.stampofIndia.com

योगदान: वह महिलाओं के कल्याण के क्षेत्र में भारत में एक सामाजिक सुधारक थे जिन्होंने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के अग्रणी काम को जारी रखा था।

सम्मान: उन्हें 1958 में भारत रत्न मिला और ऐसे पहले भारतीय हैं जिनके जीवनकाल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था। कर्वे के सम्मान में, मुंबई के क्वीन रोड का नाम बदलकर महर्षि कर्वे रोड कर दिया गया था।

उपरोक्त लेख में ऐसे प्रसिद्ध व्यक्तियो के नाम दिये गये हैं जिनके जीवन काल में ही उन पर डाक टिकट जारी किया गया था जो पाठको के ज्ञान वृद्धि में काफी लाभकारी होगा।


Thursday, 4 April 2019

एमिसैट प्रक्षेपित

🌏 एमिसैट प्रक्षेपित 🌎

EMISAT - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने  1 अप्रैल 2019 को सुबह करीब 9:27 बजे 29 उपग्रहों को अपने विश्‍वसनीय रॉकेट पीएसएलवी-45 के जरिए प्रक्षेपित कर दिया। इस मिशन के तहत इसरो ने एक स्‍वदेशी और 28 विदेशी उपग्रहों को धरती की दो अलग-अलग कक्षा में स्‍थापित किया है। इस अभियान में पहली बार चार स्‍ट्रैपऑन मोटर वाले पीएसएलवी के क्‍यूएल संस्‍करण ने उड़ान भरी थी। इससे पहले इस यान ने दो, छह या फिर बिना स्‍ट्रैपऑन मोटर के ही उड़ान भरी है। इसी अभियान के तहत इसरो ने भारत के एमिसैट (EMISAT) उपग्रह को भी सफलता पूर्वक कक्षा में स्‍थापित कर दिया। यह एक प्राइमरी उपग्रह है जिसका वजन करीब 436 किग्रा है। एमिसैट को इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है.

एमिसैट की खासियत 

इसका खास मकसद पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखना है।ये उपग्रह बॉर्डर पर रडार और सेंसर पर निगाह रखेगा।संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर नजर रखने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस उपग्रह का इस्तेमाल कर सकेगी।एमिसैट सैटेलाइट सीमा पर नजर रखने में मददगार होगा।एमिसैट का इस्तेमाल इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक स्‍पेक्‍ट्रम को मापने के लिए किया जाएगा।इसके जरिए दुश्मन देशों के रडार सिस्टम पर नजर रखने के साथ ही उनकी लोकेशन का भी पता लगाया जा सकेगा। यह दुश्मन के इलाकों का सही इलेक्ट्रॉनिक नक्शा बनाने की त्रुटिहीन जानकारी देगा। वही साथ ही दुश्मन के इलाके में मौजूद मोबाइल समेत अन्य संचार उपकरणों की भी सही जानकारी इकट्ठा करने के लिए इसका उपयोग किया जाएगा।

इन देशों के उपग्रह भी शामिल 

इस मिशन के तहत इसरो अमेरिका के 24 उपग्रहों को भी प्रक्षेपित किया, जिसमें 20 फ्लोक उपग्रह शामिल हैं, जो अर्थ ऑब्‍जरवेशन सेटेलाइट हैं। इसके अलावा वेसल ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्‍टम के साथ लेमूर उपग्रह भी शामिल है। इसके अलावा अन्‍य चार उपग्रह लिथुवानिया, स्‍पेन और स्विटजरलैंड के हैं। इस उड़ान में पीएसएलवी के चौथे चरण का उपयोग स्‍पेस से जुड़े प्रयोगों के लिए, ऑर्बिटल प्‍लेटफार्म के रूप में उपयोग में किया गया था। इस स्‍टेज में तीन भारतीय पेलोड लगाए गए थे। 

एक नजर मे  

एमसैट इंडिया का ऑटोमेटिक पैकेट रिपोर्टिंग सिस्‍टम (एपीआरएस) के अलावा इसरो का ऑटामेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्‍टम (एआईएस), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्‍पेस साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी का एडवांस्‍ड रिटार्डिंग पोटेंशियल एनालाइजर फॉर आइनोस्‍फेरिक स्‍टडीज (एआरआईएस), एपीआरएस एमेच्‍योर रेडियो एप्‍लीकेशन के लिए डिजिटल रिपोर्टर है। यह एमेच्‍योर रेडियो ऑपरेटर्स को पॉजीशन डेटा की ट्रेकिंग और मॉनिटरिंग में मदद करेगा। एआईएस को जहजों के ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन के लिए बनाया गया है। यह समुद्री जहाजों द्वारा प्रसारित किए गए संदेशों को हासिल कर उन्‍हें अर्थ स्‍टेशन को ट्रांसमिट करेगा। एआरआईएस एक प्‍लाज्‍मा और इलेक्‍ट्रोस्‍टेटिक उपकरण है। जिसको आइनोस्‍फेयर के रचना संबंधी अध्‍ययन के लिए बनाया गया है। इस पूरे अभियान में पीएसएलवी ने सबसे पहले 749 किमी की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में एमिसैट को प्रक्षेपित किया। इसके बाद अपने इंजन को दो बार फायर करने के बाद चौथा चरण पीएस-4, 504 किमी की निचली कक्षा में आया और 28 विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया। इसके बाद यह 485 किमी की कक्षा में आया जहां पर यह तीन पेलोड की मदद से यह स्‍पेस से संबंधित कुछ प्रयोग करेगा। पहली बार पीएसएलवी के चौथे चरण में सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इनका काम कक्षा में बिजली सप्‍लाई करना है। एक टेस्‍ट प्‍लेटफॉर्म के रूप में पीएस-4 की उपलब्‍धता से रियल टाइम में पृथ्‍वी के आइनोस्‍फेयर के अध्‍ययन का अवसर मिलेगा। इससे भविष्‍य में आइनोस्‍फेयर के सटीक मॉडल का विकास करने में मदद मिलेगी। यह उपग्रह के नेवीगेशन सिग्‍नल को और अधिक बेहतर और सटीक बनाने में सहायक होगा। यह मॉडल अन्‍य प्रयोगों में भी काफी मददगार साबित होंगे।
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