Sunday, 29 April 2018

उत्तर भारत के मैदान का संरचनात्मक विभाजन

उत्तर भारत के मैदान का संरचनात्मक विभाजन

उत्तर भारत का मैदान हिमालय और प्रायद्वीपीय भारत के मध्य स्थित एक लगभग समतल व उपजाऊ मैदान है|हिमालय से आने वाली नदियों (जैसे-गंगा,यमुना,कोसी,ब्रह्मपुत्र आदि) व प्रायद्वीप से आने वाली नदियों (जैसे-चंबल,सोन आदि) ने अपने साथ लाये गए जलोढ़ के निक्षेपण द्वारा इस मैदान को भारत का सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र बना दिया है| संरचना और ढाल के आधार पर उत्तर भारत के मैदान को निम्नलिखित चार भागों में बाँटा जाता है:

भाबर
तराई
खादर
बांगर

भाबर

यह शिवालिक के पर्वतपाद पर सिंधु से लेकर तीस्ता तक एक पट्टी के रूप में विस्तृत है| यह कंकरीला और पारगम्य मैदानी भाग है, जिसका निर्माण नदियों द्वारा लाये गए कंकड़ व अन्य पथरीले अवसादों के हिमालय से उतरते समय निक्षेपण से होता है, जिन्हें ‘जलोढ़ पंख’ या ‘जलोढ़ शंकु’ कहा जाता है| पहाड़ों से उतरती हुई नदियां इस क्षेत्र में आकर विलुप्त हो जाती हैं|

तराई

यह भाबर के दक्षिण में स्थित एक पट्टी है, जिसका निर्माण महीन बालू और कीचड़ से होता है| भाबर क्षेत्र में विलुप्त हुई नदियां यहाँ पुनः धरातल पर बहने लगती हैं|पूर्व में यह क्षेत्र घने वनों से ढका हुआ था लेकिन वर्तमान में उनका निर्वनीकरण हो गया है और यह क्षेत्र कृषि भूमि में बदल गया है|यह एक दलदली क्षेत्र होता है|

बांगर

यह पुरानी जलोढ़ मृदा से निर्मित मैदान है, जिसका विस्तार दो नदियों के बीच स्थित दोआब क्षेत्र में पाया जाता है| इसकी ऊँचाई  खादर की तुलना में अधिक होती है| ये बाढ़ के मैदानों से ऊपर स्थित होते हैं और खादर मैदान की तुलना में कम उपजाऊ होते हैं|

खादर

यह नवीन जलोढ़ मृदा से निर्मित मैदान है, जिसकी ऊँचाई बांगर से कम होती है| प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ के द्वारा लाये जलोढ़ अवसादों के निक्षेपण के कारण इसका नवीनीकरण होता रहता है| इसीलिए यह सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र होता है| बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल खादर क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं|

 

 

भारत के द्वीप समूह: अंडमान और निकोबार व लक्षद्वीप

भारत के द्वीप समूह: अंडमान और निकोबार व लक्षद्वीप

भारत के द्वीप समूह को दो भागों में बांटा जाता है: अरब सागर में स्थित ‘अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित ‘लक्षद्वीपसमूह|

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

बंगाल की खाड़ी या अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप स्थित हैं, जिनमें से अधिकांश 6°उ.-14°उ. अक्षांश और 92°पू.-94°पू. देशांतर के मध्य स्थित हैं| इन द्वीपों को दो भागों में बाँटा जाता है:

1. उत्तर में अंडमान द्वीपसमूह

2. दक्षिण में निकोबार द्वीपसमूह

ये दोनों द्वीपसमूह 100 चैनल द्वारा एक-दूसरे से अलग होते हैं|

अंडमान द्वीपसमूह में स्थित प्रमुख द्वीपों का उत्तर से दक्षिण क्रम इस प्रकार है:

उत्तरी अंडमान
मिडिल/मध्य अंडमान
दक्षिणी अंडमान
लिटिल अंडमान

निकोबार द्वीपसमूह में स्थित प्रमुख द्वीपों का उत्तर से दक्षिण क्रम इस प्रकार है:

कार निकोबारलिटिल निकोबारग्रेट निकोबार

ऐसा माना जाता है कि इन द्वीपसमूहों का निर्माण सागर के जल में डूबी पर्वतीय चोटियों के जल के ऊपर आने से हुआ है| इनमें से कुछ छोटे द्वीपों की उत्पत्ति ज्वालामुखी क्रिया से हुई है| भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी ‘बैरन द्वीप निकोबार द्वीप समूह में ही स्थित है|

अंडमान और निकोबार भारत का एक संघशासित/केंद्रशासित प्रदेश है, जिसकी राजधानी साउथ अंडमान में स्थित ‘पोर्ट ब्लेयर है, जोकि भारत के प्रमुख पत्तनों में से एक हैं|इस द्वीपसमूह में भूमध्यरेखीय या विषुवतीय प्रकार की जलवायु व वनस्पति पायी जाती है और संवहनीय वर्षा होती है| सघन सदाबहार वन, प्रकृतिक सुंदरता और जनजातीय जनसंख्या व संस्कृति यहाँ की पहचान है| वर्तमान में यह भारत के एक प्रमुख पर्यटन केंन्द्र के रूप में विकसित हो चुका है| अंडमान और निकोबार ‘कोको चैनल के माध्यम से म्यांमार से और ग्रेट चैनल के माध्यम से इंडोनेशिया से अलग होता है|

लक्षद्वीप समूह

अरब सागर में स्थित द्वीपसमूहों अर्थात लक्षद्वीप का निर्माण प्रवाल संरचना से हुआ है, जोकि 8°उ.-12°उ. अक्षांश और 71°पू.-74°पू. देशांतर के मधी विस्तृत हैं| इन द्वीपों की संख्या 36 है, जिनमें से केवल 11 द्वीपों पर मानवीय अधिवास पाया जाता है| ये द्वीप केरल के तट से 280-480 किमी. पूर्व में स्थित हैं| लक्षद्वीप समूह को दो भागों में बाँटा जाता है:

उत्तर में अमीनीदीवी व कन्नानोर द्वीप समूहदक्षिण में मिनीकॉय द्वीप

ये दोनों द्वीपसमूह 90 चैनल द्वारा एक-दूसरे से अलग होते हैं और 80 चैनललक्षद्वीप को मालदीव से अलग करता है| मिनीकॉय लक्षद्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है| लक्षद्वीप भारत का एक संघशासित/केंद्रशासित प्रदेश है, जिसकी राजधानी ‘कावारात्ती है| सुंदर पुलिनों (Beaches) और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह भारत के एक प्रमुख पर्यटन केंन्द्र के रूप में विकसित हो चुका है|

मानसून उत्पत्ति सम्बन्धी जेट-स्ट्रीम संकल्पना

मानसून उत्पत्ति सम्बन्धी जेट-स्ट्रीम संकल्पना

मानसून उत्पत्ति संबंधी जेट स्ट्रीम सिद्धान्त अपेक्षाकृत नवीन और विश्वसनीय सिद्धान्त है| ऊपरी वायुमंडल (9 से 18 किमी.) में प्रवाहित होने वाली तीव्र वायु-प्रणाली को ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है| जेट विमानों की उड़ान में सहायक होने के कारण इन्हें ‘जेट स्ट्रीम’ नाम दिया गया है| ये पवनें सामान्यतः पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं, लेकिन कुछ स्थानीय परिस्थितियों के कारण गर्मियों में पूर्वी जेट स्ट्रीम का उद्भव भी हो जाता है| ऊपरी वायुमंडल में प्रवाहित होने वाली ये पवनें धरतलीय मौसम की दशाओं को प्रभावित करती हैं|

मानसून उत्पत्ति संबंधी अन्य संकल्पनाएँ:

मानसून का भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्तमानसून की तापीय संकल्पना

मानसून के आगमन में जेट स्ट्रीम की भूमिका

सर्दियों के मौसम में भारत या एशिया के ऊपर ‘पछुआ जेट स्ट्रीम’ (जिसे उपोष्ण जेट स्ट्रीम या Subtropical Jet Stream भी कहा जाता है) प्रवाहित होती है, लेकिन तिब्बत हिमालय की उपस्थिति के कारण यह उत्तरी व दक्षिणी दो शाखाओं में बंट जाती है| इसकी उत्तरी शाखा हिमालय व तिब्बत के पठार के उत्तर में प्रवाहित होती है और दक्षिणी शाखा हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है|

जब तक पछुआ जेट स्ट्रीम भारत के ऊपर से प्रवाहित होती है, तब तक भारत पर उच्च दाब बना रहता है और वह धरातलीय वायु को ऊपर उठने से रोकती है| इसीलिए मई के मौसम में, जब उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक उच्च ताप पाया जाता है तब भी ऊपरी वायुमंडल में पछुआ जेट स्ट्रीम की उपस्थिति के कारण धरातलीय वायु ऊपर नहीं उठ पाती है| धरातलीय पवनों के ऊपर न उठ पाने के कारण उच्च ताप के बावजूद धरातलीय निम्न दाब नहीं बन पाता है और न ही मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित हो पाती हैं| पछुआ जेट स्ट्रीम के कारण हवाएँ उत्तर से दक्षिण की ओर अर्थात उत्तर-पूर्वी मानसून के रूप में प्रवाहित होती हैं|

गर्मियों के मौसम में जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर स्थित होता है तो पछुआ जेट स्ट्रीम भी उत्तर की ओर खिसक जाती है और हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होने वाली पछुआ जेट स्ट्रीम की धारा लुप्त हो जाती है| पछुआ जेट स्ट्रीम के लुप्त होते ही भारत के ऊपर पूर्वी जेट स्ट्रीम प्रवाहित होने लगती है| पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति तिब्बत के पठार के गर्म होने से पठार के ऊपर की वायु के ऊपर उठने से होती है, लेकिन पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति अत्यधिक अनियमित होती है|

तिब्बत के पठार के गर्म होने से पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति

पछुआ जेट स्ट्रीम के लुप्त होने और पूर्वी जेट स्ट्रीम के प्रवाहित होने के कारण ही उत्तर-पश्चिम भारत की धरातलीय गर्म पवनें ऊपर उठने लगती हैं और उच्च निम्न दाब का निर्माण हो जाता है, जिसे भरने के लिए मानसूनी पवनें भारत की ओर आकर्षित होती है और मानसून का आगमन हो जाता है| 

 

तत्व यौगिक एवं मिश्रण

तत्व यौगिक एवं मिश्रण

विज्ञान कि वह शाखा जिसमें हम विभिन्न प्रकार के रसायनों एवं उनकी अभिक्रियाओं का अध्ययन करते है, रसायन विज्ञान कहलाती है।

लेबासिये को आधुनिक रसायन विज्ञान का जन्मदाता कहा जाता है।

परमाणु - द्रव्य का वह सबसे छोटा कण जिसका स्वतंत्र अस्तित्व केवल रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ही सम्भव होता है परमाणु कहलाता है।

अणु - पदार्थ का सबसे छोटा कण जिसमें उस पदार्थ के सभी गुण मौजुद होते हैं तथा उसका स्वतंत्र अस्तित्व सम्भव हो।

तत्व - एक ही प्रकार के परमाणु से मिलकर बना पदार्थ तत्व कहलाता है।

जैसे - सोना, चांदी, आक्सीजन, हाइड्रोजन आदि।

प्रतिक - तत्वों को संकेत में लिखने को प्रतिक कहते है। बर्जीलियस ने 1813 में तत्वों के प्रतीकों के लिए एक रासायनिक प्रणाली दि जिसमें तत्वों के नाम लेटिन भाषा में थे।

यौगिक - दो या दो से अधिक तत्वों को एक निश्चित अनुपात में मिलाने से यौगिक बनता है।

जैसे - HCl(1:1),H2O(2:1)।

मिश्रण - दो या दो से अधिक पदार्थो को किसी भी अनुपात में मिलाने पर मिश्रण बनता है। जैसे - चीनी व नमक का घोल।

द्रव्य(पदार्थ) - जो स्थान घेरता है और जिसमें द्रव्यमान होता है, द्रव्य कहलाता है।

द्रव्य(पदार्थ) की अवस्थाएं(भौतिक वर्गीकरण)

1. ठोस अवस्था

2. द्रव अवस्था

3. गैसीय अवस्था

परमाणु संरचना

इलेक्ट्रान - कैथोड़ किरणों का निर्माण करने वाले ऋणावेशित कणों को इलेक्ट्रान कहते हैं।

इसकी खोज - जे. जे. थाॅमसन ने कि तथा इन्हें नाम स्टोनी ने दिया।

आवेश - 1.6*10-19 कुलाम

द्रव्यमान - 9.1*10-31 Kg. or 5.487*10-4amu.

इलेक्ट्रान का द्रव्यमान हाइड्रोजन के द्रव्यमान का 1/1835 वां भाग होता है।

प्रोटाॅन - एनोड किरणों का निर्माण करने वाले धनावेशित किरणों को प्राटोन कहते है। इसकी खोज गोल्डस्टीन ने कि।

आवेश - 1.6*10-19 कुलाम

द्रव्यमान - 1.6725*10-24 gm.

न्युट्राॅन

खोज - जेम्स चैडिविक

आवेश - उदासिन या शुन्य

द्रव्यमान - 1.6749*10-24 gm.

पोजीट्राॅन

खोज - एंडरसन

इलेक्ट्रान के विपरित कण को पोजीट्रान कहते हैं।

द्रव्यमान व आवेश - इलेक्ट्राॅन के बराबर परन्तु प्रकृति विपरित।

तत्वों को साधारणतया धातु/अधातु तथा उपधाातु में वर्गीकृत किया जाता है।

धातु

ये विधुत व ताप के सुचालक होते हैं, इन्हें खींचा(तन्य) जा सकता है। तथा पीटकर फैलाया जा सकता है।

उदाहरण - सोना, चांदी, लोहा आदि।

पारा धातु होते हुए भी कमरे के ताप पर द्रव्य अवस्था में पाया जाता है।

अधातु

ये ताप व विधुत के कुचालक होते हैं।

उदाहरण - हाइड्रोजन, आयोडिन, क्लोरिन, कोल, कार्बन।

उपधातु

कुछ तत्व धातु व अधातु के बीच के गुणों को दर्शाते हैं। उसे उपधातु कहते हैं।

उदाहरण - बोरोन, सिलिकन आदि।

अभी तक ज्ञात तत्वों की संख्या 100 से भी ज्यादा है। जिसमें 92 तत्व प्राकृतिक है तथा शेष मानव निर्मित है।

यौगिक

दो या दो से अधिक तत्वों को एक निश्चित अनुपात में मिलाने से यौगिक बनता है।

सुत्र - प्रतीकों का वह समूह जो किसी पदार्थ के संगठन को व्यक्त करता है।

सुत्र मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं

1. अणु सूत्र 2. मुलानुपाती सूत्र

अणुसूत्र

वह सूत्र जो किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है।

ग्लुकोज - C6H12O6, ऐसीटिक ऐसीड - CH3COOH।

मुलानुपातीसूत्र

वह सूत्र जो यौगिक के एक अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के सरल अनुपात को प्रदर्शित करता है। मूलानुपाती सूत्र कहलाता है।

ग्लुकोज -CH2O, ऐसीटिक ऐसीड - CH2O।

मिश्रण दो प्रकार के होते हैं।

1. समांग 2. विषमांग

समांग - एक निश्चित अनुपात में समान रूप से सर्वत्र अवयवों के मिलने से बना मिश्रण समांग मिश्रण कहलाताह है।

उदाहरण - चीनी का जल में विलयन।

विषमांग - अनिश्चित अनुपात में असमान रूप से अवयवों के मिलने से बना मिश्रण विषमांग मिश्रण कहलाता है।

उदाहरण - धुल के कणों का हवा में मिश्रण।

तथ्य

शुष्क बर्फ - ठोस कार्बन डाइआॅक्साइड को कहा जाता है।

सुर्य व तारों में चमक प्लाज्मा के कारण होती है।

प्लोरेसेट ट्यूब और नियाॅन बल्ब में प्लाज्मा होता है।

ओजोन वायु में उपस्थित सर्वाधिक निष्क्रिय गैंस है।

हाइड्रोजन ब्रह्माण में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है।

नाइट्रोजन वायुमण्डल में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है।

लीथियम सबसे हल्की धातु है।

एल्युमिनियम पृथ्वी पर सर्वाधिक पायी जाने वाली धातु है।

पारा एक मात्र द्रव्य धातु है।

सोडियम को अत्यन्त क्रियाशील होने के कारण इसे केरोसिन के तेल में रखा जाता है।

अम्लीय वर्षा - सल्फर डाईआक्साइड एवं नाइट्रोजन डाईआक्साइड से होती है। जो जल वाष्प से क्रिया कर अम्ल बनाती है।

कृत्रिम श्वसन में आक्सीजन व हीलियम का प्रयोग किया जाता है।

द्रव नाईट्रोजन का उपयोग पशुओं के विर्य को सुरक्षित रखने एवं कृत्रिम धुंए में किया जाता है।

परीक्षा में सफलता पाने के के 20 Tips

परीक्षा में सफलता पाने के के 20 Tips

सफ़लता के सूत्र

1. काम को टालने की आदत छोड़े

मित्रों, यदि आप वास्तव में सफल होना चाहतें हैं तो आपको कार्यों को टालने की आदत का त्याग करना होगा | जो कार्य ज़रूरी है , उसे सही समय पर करें | आपने सुना होगा कि “काल करे सो आज कर , आज करे सो अब , पल में परलय होएगी ,बहुरि करेगा कब” | जिसका मतलब है कि हमें कल के काम को आज और आज के काम को अभी कर लेना चाहिए |

लेकिन आज के युवाओं ने एक नए दोहे को जन्म दे दिया है | उनका कहना है कि “आज करे सो काल कर , काल करे सो परसों, इतनी जल्दी क्यों करे , अभी पड़े हैं बरसों” | दोस्तों पर सच्चाई क्या है , ये हम सभी जानते है | इसलिए हमें काम को टालना नहीं चाहिए बल्कि सभी जरूरी काम समय पर करने चाहियें |

2. अध्ययन के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करें

पढ़ाई करने के लिए एक उपयुक्त एवं शांत जगह का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है | पढ़ाई का स्थान ऐसा होना चाहिए जहाँ पर पूरी एकाग्रता और शांत मन से बैठकर पढ़ा जा सके | यदि घर छोटा हो या घर में ऐसा कोई उपयुक्त स्थान ना हो तो घर के बाहर किसी शांत जगह , किसी दोस्त के घर या किसी पुस्तकालय (Library) में जाकर पढ़ना ज्यादा अच्छा होगा |

3. पढ़ाई के लिए समय सारणी बनाएं

जो भी विद्यार्थी सफल होना चाहता है उसके लिए आवश्यक है कि वह पढ़ाई के लिए निर्धारित किये गए समय की एक समय सारणी (Time Table) बनाएं | उस समय सारणी में हर विषय के लिए एक निश्चित समय आवंटित करें | एक सही समय सारणी बनाने पर ही आप हर विषय पर सही ध्यान दे पायेंगे | दोस्तों , केवल समय सारणी बना लेना ही पर्याप्त नहीं है , उसका पालन करना भी ज़रूरी है |

4. खेल कूद एवं मनोरंजन के लिए समय दें

एक विद्यार्थी के सर्वांगिक विकास (Comprehensive Development ) के लिए ज़रूरी है कि उसे पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद और अपने मनोरंजन के लिए भी समय देना चाहिए | खेल कूद से शारीरिक विकास होता है | घर के अन्दर भी आप बुद्धिवर्धक खेलों ( Memory Improvement Games ) का आनंद ले सकते हैं |

5. बड़े कार्यों को छोटे छोटे भागों में बाँटें

कोई भी बड़ा कार्य जब हम करने लगते हैं तो शुरुआत में बहुत कठिन और असंभव लगता है | लेकिन जब हम उसे छोटे छोटे टुकड़ों में बाँट देते हैं और तो वही काम आसान हो जाता है | इसी प्रकार पढ़ाई में भी बड़े Chapter या Formula को छोटे भागों में बाँट कर आसान बनाया जा सकता है | इससे पढ़ना आसान और रुचिकर हो जाता है |

6. अपने ऊर्जा स्तर को जानें

दिन में अलग अलग समय पर हर व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक उर्ज़ा का स्तर अलग हो सकता है | उदाहरण के तौर पर कुछ लोग सुबह के समय ज्यादा Fresh और Energetic महसूस करते हैं तो कुछ लोग शाम को या फिर रात के समय | कुछ लोगों को सुबह उठ कर पढ़ा हुआ ज्यादा याद रहता है तो कुछ को देर रात को पढ़ा हुआ | तो जिस समय आप अपने को ज्यादा Fresh और उर्ज़ावान महसूस करते हैं, वह समय आप अपनी पढ़ाई के लिए रखें |

7. पढ़ाई के बीच अल्प विश्राम लें

पढ़ाई करते समय आपका दिमाग थक जाता है | जब भी आप थकान महसूस करें तो एक अल्प विश्राम (Short Break) ज़रूर लें | आमतौर पर पढ़ाई करते समय 30 से 40 मिनट के बाद आपको थोड़ा आराम करना चाहिए |

8. मुख्य बिन्दुओं को Highlight करें

जब भी आप पढ़ाई करने बैठें, तो अपने साथ एक Highlighter Pen हमेशा रखें | अगर आपको कोई महत्वपूर्ण नाम, तिथि, स्थान या वाक्य दिखाई देता है तो तुरंत उसे Highlight कर लीजिये | इस तरह से Revision करते समय आपको काफ़ी मदद मिलेगी |

9. अपना लक्ष्य निर्धारित करें

जीवन में अपनी पढ़ाई के लक्ष्य निर्धारित कीजिये | आप कौन सा Chapter या किताब कितने दिनों में ख़त्म करना चाहते हैं, कौन से Subjects पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है अथवा अपने मनपसंद कॉलेज में जाने के लिए कितने प्रतिशत अंकों की ज़रूरत होगी | इस प्रकार अपनी पढ़ाई के लक्ष्यों तो तय करना बहुत ज़रूरी है | अगर आप हर हफ्ते, महीने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए पढ़ाई करेंगे तो साल के अंत में बिना घबराहट के सही ढंग से परीक्षा की तैयारी कर पायेंगे |

10. सभी ज्ञानेन्द्रियों (Senses) को सम्मिलित करें

अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों (कान, नाक, आँख, जीभ और त्वचा) का यथासंभव प्रयोग अपनी पढ़ाई में करें | किताब में छपे पिक्चर और चार्ट्स आदि को ध्यान से देखें | यदि संभव हो तो लैब में Practical करें या विषय से सम्बंधित मॉडल को छू कर देखें | आजकल किताबों के साथ CD भी आती है | इन CDs से भी विषय को समझने में काफ़ी मदद मिलती है |

11. बुद्धिवर्धक तकनीकों का प्रयोग करें

यदि आप बुद्धिवर्धक तकनीकों (Memory Improvement Techniques) के बारे में जानते हैं या आपने इन्हें कहीं से सीखा है, तो इनका प्रयोग अपनी पढ़ाई में ज़रूर करिये | ये Techniques बहुत ही वैज्ञानिक और रिजल्ट ओरिएंटेड होती हैं |

12. संतुलित भोजन करें

एक पुरानी कहावत है “जैसा अन्न , वैसा मन”, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन और शरीर बनता है | यह बहुत ज़रूरी है कि आप संतुलित भोजन लें | कोल्ड ड्रिंक्स और पिज़्ज़ा व बर्गर जैसे जंक फ़ूड से बचें | भोजन का सही तरीका है कि आप सुबह का नाश्ता भारी , दोपहर का भोजन उससे हल्का और रात का भोजन उससे भी हल्का लें | यदि संभव हो तो रात के भोजन में केवल सलाद (Salad) और द्रव्य पदार्थ (Liquids) ही लें |

13. शरीर को स्वस्थ रखें

क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मन निवास करता है, इसलिए सुबह के समय सैर पर जायें और अपने सामर्थ्य के अनुसार व्यायाम(Exercise) करें | जितना स्वस्थ आपका शरीर होगा, उतने ही आप एक्टिव और आत्मविश्वास से भरे रहेंगे |

14. प्रश्नों का उत्तर खोजें

यदि आपके मन में कोई प्रश्न है या किसी प्रश्न का उत्तर आपको समझ नहीं आता तो निसंकोच अपने अध्यापक से सहायता मांगें | हो सकता है कि ज्यादा या बार बार प्रश्न पूछने के लिए आपके अध्यापक आपको डांट दें, पर विश्वास कीजिये कि जो विद्यार्थी वास्तव में सीखने की इच्छा रखता है उसे सभी टीचर्स पसंद करते हैं और उसकी मदद के लिए सदा तैयार रहते हैं |

15. सभी संसाधनों का प्रयोग करें

पढ़ाई के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों (Resources) का भरपूर प्रयोग करें | किताबों को ध्यान से पढ़ें, पुस्तकालय (Library) में जायें, अपने अध्यापकों और अभिभावकों से सहायता लें, दोस्तों और बड़े भाई-बहन से मदद मांगें, इन्टरनेट और टेलीविज़न आदि सभी उपलब्ध संसाधनों का सकारात्मक प्रयोग अपनी पढ़ाई के लिए करें |

16. ब्लेंक कार्ड्स (Blank Cards) का प्रयोग करें

पढ़ते समय किसी विशेष बात या किसी उत्तर के मुख्य बिन्दुओं (Main Points) को लिखने के लिए आप छोटे छोटे साइज़ के ब्लेंक कार्ड्स या पर्चियों का प्रयोग कर सकते है | ये कार्ड्स आपको revision करते समय काफ़ी मददगार साबित होंगे | परंतु सावधान, इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए की आप इन्हें परीक्षा के समय नकल (Cheat Notes) के रूप में प्रयोग करें |

17. स्वयं को प्रोत्साहित करें

परीक्षा भवन में जाने से पूर्व स्वयं को प्रोत्साहित (Motivate) करें | जीवन की उन घटनाओं को याद करें, जब आप सफल हुए थे | अपने आप को विश्वास दिलाएं कि आप पहले भी कठिन परिस्थितियों एवं परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं | इस परीक्षा में भी आप ज़रूर अच्छे अंकों के साथ सफल होंगे | इस प्रकार के सकारात्मक विचारों से आपका मनोबल बढ़ेगा और आप परीक्षा में अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पायेंगे |

18. प्रश्नपत्र को ध्यान पूर्वक पढ़ें

जब भी आप कोई परीक्षा देते हैं तो उत्तर लिखना शुरू करने से पहले, प्रश्नपत्र को कम से कम दो बार ध्यानपूर्वक पढ़ लें | यह सुनिश्चित कर लें कि प्रश्न क्या है और उसका सही उत्तर क्या होगा | कई बार घबराहट में हम प्रश्न समझ ही नहीं पाते और गलत उत्तर लिख देते हैं |

19. अधिक मात्रा में जल लें

विज्ञान इस बात को प्रमाणित कर चुका है कि शरीर में जल का स्तर जितना अधिक रहता है, उतना ही हमारा मस्तिष्क अधिक कुशलता के साथ कार्य करता है | इस लिए अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिये | पढ़ाई करते समय अपने पास पानी की एक बोतल रखनी चाहिए | अगर संभव हो तो परीक्षा केंद्र (Examination Centre) में भी अपने साथ एक पानी की बोतल ले कर जायें और समय-समय पर पानी पीते रहें |

20. शांत हो जायें

परीक्षा में यदि उत्तर याद करने में कठिनाई हो तो घबराने कि आवश्यकता नहीं है | घबराहट से स्थिति और अधिक  बिगड़ सकती है | आँखें बंद करके कुछ पल के लिए चुपचाप बैठ जायें और गहरी सांस लें | इससे आपके मन को शांत करने में सहायता मिलेगी | फिर धीरे-धीरे उत्तर याद करने की कोशिश करें | जो भी मुख्य बिंदु (Main Point) याद आये उसे कागज़ पर लिख लें |

 

Featured post

करेंट अफेयर्स साप्ताहिक एक पंक्ति:

करेंट अफेयर्स साप्ताहिक एक पंक्ति:  •    भारत और जिस देश के विदेश कार्यालयों के बीच 16वें दौर की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित ...